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हम कई बार कहना कुछ और चाहते हैं, कह दूसरा जाते हैं। फिर चाहे हम प्रार्थना करें, क्रोध करें या फिर किसी से सामान्य बातचीत शब्दों के अर्थ गहरे होते हैं जो उनको समझ जाते हैं वह सरलता से जीवन को उपलब्ध होते रहते हैं। अपने शब्दों को कभी व्यर्थ न जाने दें। हम बहुत व्याकुल, गुस्सैल और आत्मकेंद्रित हो रहे हैं। दूसरों के प्रति सहयोग और जीवन के प्रति आस्था को मजबूत कीजिए। प्रेम, अनुराग और सहृदयता जीवन मूल्य हैं। इनको केवल शब्द समझने से बचना होगा।छोटी-सी कहानी आपसे कहता हूं। संभव है इससे मेरी बात सरलता से आप तक पहुंच जाए।

